हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.50.2

कांड 7 → सूक्त 50 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 50
यास्ते॑ राके सुम॒तयः॑ सु॒पेश॑सो॒ याभि॒र्ददा॑सि दा॒शुषे॒ वसू॑नि । ताभि॑र्नो अ॒द्य सु॒मना॑ उ॒पाग॑हि सहस्रापो॒षं सु॑भगे॒ ररा॑णा ॥ (२)
हे राका अर्थात्‌ पूर्णिमा देवी! तेरी जो सुंदर रूप वाली कल्याण बुद्धियां हैं, जिन के द्वारा तू हवि देने वाले यजमान को धन प्रदान करती है, आज तू उन्हीं कल्याणकारी बुद्धियों एवं शोभन मन से युक्त हो कर हमारे समीप आ. तू हमें बहुत से धनों का पोषण देती हुई आ. (२)
O Raka i.e. Purnima Devi! Your beautiful welfare intellects, through which you give wealth to the host who gives happiness, today you come to us with the same welfare intellects and graceful minds.