हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 56
ऋचं॒ साम॑ यजामहे॒ याभ्यां॒ कर्मा॑णि कु॒र्वते॑ । ए॒ते सद॑सि राजतो य॒ज्ञं दे॒वेषु॑ यच्छतः ॥ (१)
हे धन देने वाले इंद्र! तुम्हारे जो मार्ग ्युलोक से नीचे वर्तमान हैं, उन विश्व प्रेरक मार्गों के द्वारा हमें सुख में स्थापित करो. अर्थात्‌ हमें सुख प्रदान करो. (१)
O Indra, the giver of wealth! Establish us in happiness through the world-inspiring paths that are present below your world. That is, give us happiness. (1)