हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.68.1

कांड 7 → सूक्त 68 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 68
यद्य॒न्तरि॑क्षे॒ यदि॒ वात॒ आस॒ यदि॑ वृ॒क्षेषु॒ यदि॒ वोल॑पेषु । यदश्र॑वन्प॒शव॑ उ॒द्यमा॑नं॒ तद्ब्राह्म॒णं पुन॑र॒स्मानु॒पैतु॑ ॥ (१)
आकाश के मेघाच्छन्न होने पर, आंधी चलने पर, वृक्षों की छाया में, फसलों में, ग्रामीण एवं जंगली पशुओं के समीप मैं ने जो वेदाध्ययन किया है अथवा वेदपाठ सुना है, वह भी मेरे लिए फलदायक हो. (१)
May the Vedas that I have studied or heard the Vedas when the sky is cloudy, in the shade of trees, in the shade of trees, in crops, near rural and wild animals, it should also be fruitful for me. (1)