अथर्ववेद (कांड 7)
अ॒स्मै क्ष॒त्राणि॑ धा॒रय॑न्तमग्ने यु॒नज्मि॑ त्वा॒ ब्रह्म॑णा॒ दैव्ये॑न । दी॑दि॒ह्यस्मभ्यं॒ द्रवि॑णे॒ह भ॒द्रं प्रेमं वो॑चो हवि॒र्दां दे॒वता॑सु ॥ (२)
हे अग्नि देव! इस यजमान के लिए बल धारण करने वाले तुम को मैं देव संबंधी मंत्र के द्वारा हवि वहन करने के लिए युक्त करता हूं. इस समय हमें धन एवं पुत्र आदि की प्राप्ति का सुख प्रदान करो. हवि देने वाले इस यजमान के विषय में अग्नि, इंद्र आदि देवों को बताओ. (२)
O God of Agni! I use you, who are strong for this host, to bear the havi through the mantra related to God. At this time, give us the happiness of getting wealth and son etc. Tell the gods like Agni, Indra etc. about this host who gives havi. (2)