अथर्ववेद (कांड 7)
भ॒द्रादधि॒ श्रेयः॒ प्रेहि॒ बृह॒स्पतिः॑ पुरए॒ता ते॑ अस्तु । अथे॒मम॒स्या वर॒ आ पृ॑थि॒व्या आ॒रेश॑त्रुं कृणुहि॒ सर्व॑वीरम् ॥ (१)
हे वस्त्र, धन आदि का लाभ चाहने वाले पुरुष! तू उत्तरोतर कल्याणकारी संपत्ति प्राप्त कर. लाभ के हेतु जाते हुए तेरे आगेआगे बृहस्पति चलें. हे बृहस्पति! तुम पृथ्वी के उस उत्तम स्थान पर इस पुरुष को स्थापित करो, जहां धन आदि लाभ प्राप्त हों. इस के सभी पुत्र, पौत्र आदि वीर हों एवं इस के शत्रु इस से दूर रहें. (१)
O men who want the benefit of clothes, money, etc.! You get welfare property later. Jupiter walk ahead of you while going for profit. O Jupiter! You should establish this man in that best place on earth, where money etc. benefits are received. All its sons, grandsons etc. should be brave and its enemies should stay away from it. (1)