अथर्ववेद (कांड 8)
रक्ष॑न्तु त्वा॒ग्नयो॒ ये अ॒प्स्वन्ता रक्ष॑तु त्वा मनु॒ष्या॒ यमि॒न्धते॑ । वै॑श्वान॒रो र॑क्षतु जा॒तवे॑दा दि॒व्यस्त्वा॒ मा प्र धा॑ग्वि॒द्युता॑ स॒ह ॥ (११)
जल के मध्य में जो वाडव आदि अन्नियां हैं, वे तेरी रक्षा करें. मनुष्य यज्ञ करने के लिए अथवा भोजन पकाने के लिए जिन अग्नियों को जलाते हैं, वे तेरी रक्षा करें. जन्म लेने वालों को जानने वाले जठराग्नि देव तेरी रक्षा करें. आकाश की बिजली तेरे शरीर के साथ रहती हुई तुझे भस्म न करे. (११)
May the vadavas etc. in the middle of the water protect you. May the agnis that humans burn to perform yajna or to cook food protect you. May the jatharagni god, who knows those who are born, protect you. The lightning of the sky should not consume you while living with your body. (11)