हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 8.1.13

कांड 8 → सूक्त 1 → मंत्र 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
बो॒धश्च॑ त्वा प्रतीबो॒धश्च॑ रक्षतामस्व॒प्नश्च॑ त्वानवद्रा॒णश्च॑ रक्षताम् । गो॑पा॒यंश्च॑ त्वा॒ जागृ॑विश्च रक्षताम् ॥ (१३)
गोबोध और प्रतिबोध नामक ऋषि तेरी रक्षा करें. स्वप्न न देखने वाला, निद्रा न लेने वाला, सदा शरीर की रक्षा करने वाला तथा जागने वाला देव - ये सब तेरी रक्षा करें. (१३)
May sages called Gobodh and Pratibodh protect you. God who does not dream, does not sleep, always protects the body and wakes up - may all this protect you. (13)