अथर्ववेद (कांड 8)
यद॒श्नासि॒ यत्पि॑बसि धा॒न्यं कृ॒ष्याः पयः॑ । यदा॒द्यं यद॑ना॒द्यं सर्वं॑ ते॒ अन्न॑मवि॒षं कृ॑णोमि ॥ (१९)
हे कुमार! तुम जिस प्रकार के अनाज को कठिनता से खाते हो तथा दूध के समान सारवान पिसे हुए धान्य को पीते हो, जो अन्न सुख से खाने योग्य है तथा जो खाने में कठिन है, इन सभी प्रकार के अन्नों को मैं विषहीन बनाता हूं. (१९)
O Kumar! The kind of grain you eat hard and drink the coarsely ground grain like milk, which is comfortable to eat and which is difficult to eat, I make all these types of food poisonless. (19)