अथर्ववेद (कांड 8)
यः पौरु॑षेयेण क्र॒विषा॑ सम॒ङ्क्ते यो अश्व्ये॑न प॒शुना॑ यातु॒धानः॑ । यो अ॒घ्न्याया॒ भर॑ति क्षी॒रम॑ग्ने॒ तेषां॑ शी॒र्षाणि॒ हर॒सापि॑ वृश्च ॥ (१५)
जो राक्षस पुरुषों के मांस से अपना पोषण करता है तथा घोड़े और बकरी आदि के मांस से पुष्ट होता है, हे अग्नि देव! जो राक्षस गाय का दूध चुराता है. उन सब के सिरों को अपनी ज्वाला से काट दो. (१५)
The demon who nourishes himself with the flesh of men and is strengthened by the flesh of horses and goats etc., O Agni God! The monster who steals cow's milk. Cut off the ends of all of them with your flame. (15)