अथर्ववेद (कांड 8)
स॒नाद॑ग्ने मृणसि यातु॒धाना॒न्न त्वा॒ रक्षां॑सि॒ पृत॑नासु जिग्युः । स॒हमू॑रा॒ननु॑ दह क्र॒व्यादो॒ मा ते॑ हे॒त्या मु॑क्षत॒ दैव्या॑याः ॥ (१८)
हे अग्नि देव! तुम चिरकाल से राक्षसों का हनन करते हो, फिर भी राक्षस युद्धों में तुम्हें जीत नहीं सकते हैं. इसलिए तुम मांसाहारी राक्षसों को मूल सहित जला दो. वे तुम्हारे दैवी आयुध से न बच सकें. (१८)
O God of Agni! You have been violating demons since time immemorial, yet demons cannot conquer you in wars. So you burn carnivorous monsters including the original. They cannot escape your divine armament. (18)