हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 8.3.19

कांड 8 → सूक्त 3 → मंत्र 19 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 3
त्वं नो॑ अग्ने अध॒रादु॑द॒क्तस्त्वं प॒श्चादु॒त र॑क्षा पु॒रस्ता॑त् । प्रति॒ त्ये ते॑ अ॒जरा॑स॒स्तपि॑ष्ठा अ॒घशं॑सं॒ शोशु॑चतो दहन्तु ॥ (१९)
हे अग्नि देव! तुम नीचे की दिशा से पीड़ा पहुंचाने वाले राक्षसों से, ऊपर की दिशा से पीड़ा पहुंचाने वाले राक्षसों से तथा पूर्व दिशा से पीड़ा पहुंचाने वाले राक्षसों से हमारी रक्षा करी. सर्वत्र वर्तमान तुम्हारी चिनगारी पापी राक्षसों का विनाश करे. हे राक्षस! अग्नि देव वृद्ध न होने वाले, अतिशय संतापकारी एवं दीप्ति वाले हैं. (१९)
O God of Agni! You protect us from demons who hurt from the lower direction, demons who hurt from the upward direction and demons who hurt from the east direction. May the present present everywhere destroy your sinful demons. O monster! Agni Dev is not old, very angry and radiant. (19)