अथर्ववेद (कांड 8)
वर्म॑ मे॒ द्यावा॑पृथि॒वी वर्माह॒र्वर्म॒ सूर्यः॑ । वर्म॑ म॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॒ वर्म॑ धा॒ता द॑धातु मे ॥ (१८)
धरती और आकाश के देवता मेरे लिए कवच बनें. दिवस और सूर्य मेरे लिए कवच बनें. इंद्र और अग्नि मेरे लिए कवच बनें. (१८)
May the gods of earth and sky be my shield. Day and sun be armor for me. Indra and Agni become shields for me. (18)