अथर्ववेद (कांड 8)
प॑र्यस्ता॒क्षा अप्र॑चङ्कशा अस्त्रै॒णाः स॑न्तु॒ पण्ड॑गाः । अव॑ भेषज पादय॒ य इ॒मां सं॒विवृ॑त्स॒त्यप॑तिः स्वप॒तिं स्त्रिय॑म् ॥ (१६)
इधरउधर फैली हुई आंखों वाले, पतली जंघाओं वाले एवं पैरों से न चलने वाले जो पिशाच हैं, वे बिना स्त्रियों वाले हो जाएं. हे सरसों रूपी ओषधि! तुम उन्हें नीचे की ओर मुंह कर के गिराओ. जो अनियंत्रित पिशाच इस पति वाली गर्भिणी स्त्री को वश में करना चाहते हैं, उन का विनाश करो. (१६)
Here, vampires with wide eyes, thin thighs and no feet should become without women. O mustard medicine! You drop them facing down. Destroy the uncontrolled vampires who want to subdue this husband's pregnant woman. (16)