अथर्ववेद (कांड 8)
उ॑द्ध॒र्षिणं॒ मुनि॑केशं ज॒म्भय॑न्तं मरी॒मृशम् । उ॒पेष॑न्तमुदु॒म्बलं॑ तु॒ण्डेल॑मु॒त शालु॑डम् । प॒दा प्र वि॑ध्य॒ पार्ष्ण्या॑ स्था॒लीं गौरि॑व स्पन्द॒ना ॥ (१७)
अत्यधिक घर्षण वाले, मुनियों के समान लंबी जटाओं वाले, हिंसक, बारबार कष्ट देने वाले एवं गर्भिणी को सभी ओर खोजने वाले उदुंबल, तुंडेल एवं शालुड असुरों को हे सरसों नामक ओषधि! अपने पैर से भलीभांति चोट कर के इस प्रकार मार डाल, जिस प्रकार बुरी गाय मिट्टी की दोहनी को पिछले पैर मार कर तोड़ देती है. (१७)
O mustard medicine to the Udumbala, Tundel and Shalud asuras with extreme friction, long jatas like munis, violent, frequent suffering and looking for the womb all over! Kill your foot well, just as the bad cow breaks the soil harness by hitting the back foot. (17)