अथर्ववेद (कांड 8)
याव॑तीषु मनु॒ष्या भेष॒जं भि॒षजो॑ वि॒दुः । ताव॑तीर्वि॒श्वभे॑षजी॒रा भ॑रामि॒ त्वाम॒भि ॥ (२६)
हे रोगी पुरुष! वैद्य जितनी भी जड़ीबूटियों को ओषधि के रूप में जानते हैं, उन समस्त जड़ीबूटियों को मैं तेरी चिकित्सा के लिए लाता हूं. (२६)
O patient man! All the herbs that the physician knows as medicines, I bring all those herbs for your treatment. (26)