अथर्ववेद (कांड 8)
या ब॒भ्रवो॒ याश्च॑ शु॒क्रा रोहि॑णीरु॒त पृश्न॑यः । असि॑क्नीः कृ॒ष्णा ओष॑धीः॒ सर्वा॑ अ॒च्छाव॑दामसि ॥ (१)
जो जड़ीबूटियां विभिन्न आकारों तथा शुक्ल, लाल आदि रंगों की हैं, उन सभी के सामने उपस्थित हो कर मैं रोग निवारण की प्रार्थना करता हूं. (१)
I pray for the prevention of disease by appearing in front of all the herbs which are of different sizes and colors like Shukla, Red etc. (1)
अथर्ववेद (कांड 8)
त्राय॑न्तामि॒मं पुरु॑षं॒ यक्ष्मा॑द्दे॒वेषि॑ता॒दधि॑ । यासां॒ द्यौष्पि॒ता पृ॑थि॒वी मा॒ता स॑मु॒द्रो मूलं॑ वी॒रुधां॑ ब॒भूव॑ ॥ (२)
पृथ्वी जिन की माता, आकाश जिन का पिता और सागर जिन का मूल है, वे जड़ीबूटियां दुर्भाग्य के कारण उत्पन्न इस राजयक्ष्मा रोग से इस पुरुष की रक्षा करें. (२)
Earth whose mother, sky whose father and ocean is the root, those herbs protect this man from this rajakshama disease caused by misfortune. (2)
अथर्ववेद (कांड 8)
आपो॒ अग्रं॑ दि॒व्या ओष॑धयः । तास्ते॒ यक्ष्म॑मेन॒स्यमङ्गा॑दङ्गादनीनशन् ॥ (३)
हे रोगी पुरुष! जो पवित्र जल और दिव्य जड़ीबूटियां हैं, वे तेरे शरीर के प्रत्येक अंग से यक्ष्मा रोग का विनाश कर दें. (३)
O patient man! May the holy water and divine herbs destroy tuberculosis from every part of your body. (3)
अथर्ववेद (कांड 8)
प्र॑स्तृण॒ती स्त॒म्बिनी॒रेक॑शुङ्गाः प्रतन्व॒तीरोष॑धी॒रा व॑दामि । अं॑शु॒मतीः॑ का॒ण्डिनी॒र्या विशा॑खा॒ ह्वया॑मि ते वी॒रुधो॑ वैश्वदे॒वीरु॒ग्राः पु॑रुष॒जीव॑नीः ॥ (४)
हे यक्ष्मा रोग से ग्रसित पुरुष! मैं तेरे स्वास्थ्य लाभ के निमित्त फैली हुई, बहुत सी टहनियों वाली, एक टहनी वाली, गांठों वाली, पत्तियों वाली, शाखाओं से रहित एवं नसों वाली जो जड़ीबूटियां तुझे जीवन देने वाली हैं, उन सभी अत्यधिक प्रभावशालिनी एवं समस्त देवों के निवास वाली जड़ीबूटियों को तेरे लिए ग्रहण करता हूं. (४)
O man suffering from tuberculosis! I accept for you all the herbs that are spread out for your health, with many twigs, one twig, lumps, leaves, without branches and veins that are going to give you life, all those highly effective and inhabited by all the gods. (4)
अथर्ववेद (कांड 8)
यद्वः॒ सहः॑ सहमाना वी॒र्यं यच्च॑ वो॒ बल॑म् । तेने॒मम॒स्माद्यक्ष्मा॒त्पुरु॑षं मुञ्चतौषधी॒रथो॑ कृणोमि भेष॒जम् ॥ (५)
हे रोगों का विनाश करने वाली जड़ीबूटियों! तुम में जो रोग नाश करने वाली शक्ति, वीर्य और बल है, उस के द्वारा इस पुरुष की यक्ष्मा रोग से रक्षा करो. मैं सभी ओषधियों को मंत्रो से युक्त बनाता हूं. (५)
O herbs that destroy diseases! Protect this man from tuberculosis through the disease-destroying power, semen and force that you have. I make all the medicines with mantras. (5)
अथर्ववेद (कांड 8)
जी॑व॒लां न॑घारि॒षां जी॑व॒न्तीमोष॑धीम॒हम् । अ॑रुन्ध॒तीमु॒न्नय॑न्तीं पु॒ष्पां मधु॑मतीमि॒ह हु॑वे॒ऽस्मा अ॑रि॒ष्टता॑तये ॥ (६)
कल्याण के निमित्त मैं जीवन देने वाली एवं क्रोध न करने वाली जीवंती एवं अरुंधती नामक जड़ी बूटियों का आह्वान करता हूं. ये जड़ीबूटियां ऊपर की ओर बढ़ने वाली, पुष्पों से युक्त एवं मधु सहित हैं. (६)
For the sake of welfare, I call for life-giving and non-angry vibrancy and herbs called Arundhati. These herbs are upward-growing, flower-rich and honey-rich. (6)
अथर्ववेद (कांड 8)
इ॒हा य॑न्तु॒ प्रचे॑तसो मे॒दिनी॒र्वच॑सो॒ मम॑ । यथे॒मं पा॒रया॑मसि॒ पुरु॑षं दुरि॒तादधि॑ ॥ (७)
मेरे मंत्रों के प्रभाव से चेतनायुक्त जड़ीबूटियां यहां आएं तथा इस रोग के कारण रूप पाप का विनाश करें. (७)
With the effect of my mantras, conscious herbs should come here and destroy the sin caused by this disease. (7)
अथर्ववेद (कांड 8)
अ॒ग्नेर्घा॒सो अ॒पां गर्भो॒ या रोह॑न्ति॒ पुन॑र्णवाः । ध्रु॒वाः स॒हस्र॑ना॒म्नीर्भे॑ष॒जीः स॒न्त्वाभृ॑ताः ॥ (८)
जो जड़ीबूटियां जल का गर्भ हैं, अग्नि का भोजन हैं तथा बारबार उगने के कारण नवीन रहती हैं, इस प्रकार की हजारों नाम वाली जड़ीबूटियां नित्य यहां लाई जाएं. (८)
The herbs which are the womb of water, the food of agni and are new due to frequent growth, such thousands of named herbs should be brought here regularly. (8)