अथर्ववेद (कांड 8)
आपो॒ अग्रं॑ दि॒व्या ओष॑धयः । तास्ते॒ यक्ष्म॑मेन॒स्यमङ्गा॑दङ्गादनीनशन् ॥ (३)
हे रोगी पुरुष! जो पवित्र जल और दिव्य जड़ीबूटियां हैं, वे तेरे शरीर के प्रत्येक अंग से यक्ष्मा रोग का विनाश कर दें. (३)
O patient man! May the holy water and divine herbs destroy tuberculosis from every part of your body. (3)