हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 8.7.5

कांड 8 → सूक्त 7 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
यद्वः॒ सहः॑ सहमाना वी॒र्यं यच्च॑ वो॒ बल॑म् । तेने॒मम॒स्माद्यक्ष्मा॒त्पुरु॑षं मुञ्चतौषधी॒रथो॑ कृणोमि भेष॒जम् ॥ (५)
हे रोगों का विनाश करने वाली जड़ीबूटियों! तुम में जो रोग नाश करने वाली शक्ति, वीर्य और बल है, उस के द्वारा इस पुरुष की यक्ष्मा रोग से रक्षा करो. मैं सभी ओषधियों को मंत्रो से युक्त बनाता हूं. (५)
O herbs that destroy diseases! Protect this man from tuberculosis through the disease-destroying power, semen and force that you have. I make all the medicines with mantras. (5)