अथर्ववेद (कांड 8)
को वि॒राजो॑ मिथुन॒त्वं प्र वे॑द॒ क ऋ॒तून्क उ॒ कल्प॑मस्याः । क्रमा॒न्को अ॑स्याः कति॒धा विदु॑ग्धा॒न्को अ॑स्या॒ धाम॑ कति॒धा व्युष्टीः ॥ (१०)
प्रजापति विराट् के मिथुन को जानते हैं. ऋलुओं और कल्पों के जानने वाले भी वे ही हैं. प्रजापति ही इस के क्रमों को जानते हैं कि वे कितने हैं तथा वे ही इस के स्थानों की संख्या जानते हैं. (१०)
Prajapati knows Virat's Gemini. They are also the ones who know the realities and kalpas. Prajapati knows the sequence of this, how many they are and he knows the number of places it has. (10)