हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 8.9.13

कांड 8 → सूक्त 9 → मंत्र 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 9
ऋ॒तस्य॒ पन्था॒मनु॑ ति॒स्र आगु॒स्त्रयो॑ घ॒र्मा अनु॒ रेत॒ आगुः॑ । प्र॒जामेका॒ जिन्व॒त्यूर्ज॒मेका॑ रा॒ष्ट्रमेका॑ रक्षति देवयू॒नाम् ॥ (१३)
सूर्य, चंद्र एवं अग्नि-ये तीनों सत्यों के मार्ग पर चलते एवं शक्ति के अनुसार अपने धर्म का पालन करते हैं. इन तीन में से एक की शक्ति ऋत्विजों को प्राप्त करती है. दूसरी शक्ति बल की वृद्धि करती है और तीसरी शक्ति राष्ट्र की रक्षा करती है. (१३)
Sun, Moon and Agni - these three follow the path of truth and follow their dharma according to power. The power of one of these three attains the Ritvijas. The second power increases the force and the third power protects the nation. (13)