हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 8.9.6

कांड 8 → सूक्त 9 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 9
वै॑श्वान॒रस्य॑ प्रति॒मोपरि॒ द्यौर्याव॒द्रोद॑सी विबबा॒धे अ॒ग्निः । ततः॑ ष॒ष्ठादामुतो॑ यन्ति॒ स्तोमा॒ उदि॒तो य॑न्त्य॒भि ष॒ष्ठमह्नः॑ ॥ (६)
यह द्यौ वैश्वानर अग्नि पर ही स्थित है. धरती और आकाश जहां तक हैं, वहीं तक अग्नि देव बाधा पहुंचा सकते हैं. दिन के छठे भाग से स्तोत उत्पन्न हुआ. उस छठे भाग से ये आते हैं. (६)
It is located on the Dyau Vaishnavar agni. As far as the earth and sky are, agni god can obstruct. Stota originated from the sixth part of the day. They come from that sixth part. (6)