अथर्ववेद (कांड 9)
मधु॑ जनिषीय॒ मधु॑ वंशिषीय । पय॑स्वानग्न॒ आग॑मं॒ तं मा॒ सं सृ॑ज॒ वर्च॑सा ॥ (१४)
हे अग्नि! मैं दुग्ध आदि हवि से युक्त हो कर आया हूं. मैं मधु को प्रकट कर के उस के द्वारा तेजस्वी बनू. मुझ में अपने वचन से तेज स्थापित करो. (१४)
O agni! I have come with milk etc. I will reveal Madhu and be stunning through her. Establish in me sharp with your word. (14)