हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.1.15

कांड 9 → सूक्त 1 → मंत्र 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
सं मा॑ग्ने॒ वर्च॑सा सृज॒ सं प्र॒जया॒ समायु॑षा । वि॒द्युर्मे॑ अ॒स्य दे॒वा इन्द्रो॑ विद्यात्स॒ह ऋषि॑भिः ॥ (१५)
हे अग्नि! तुम मुझे अपने तेज, संतान एवं आयु से युक्त करो. देवगण और ऋषियों के साथ इंद्र मुझे तुम्हारी सेवा करने वाला जानें. (१५)
O agni! You make me rich in your radiance, children and age. Indra, along with devgans and sages, knows me to serve you. (15)