अथर्ववेद (कांड 9)
अश्वि॑ना सार॒घेण॑ मा॒ मधु॑नाङ्क्तं शुभस्पती । यथा॒ वर्च॑स्वतीं॒ वाच॑मा॒वदा॑नि॒ जनाँ॒ अनु॑ ॥ (१९)
हे शोभा के लिए स्वर्ण के आभूषण धारण करने वाले अश्चिनीकुमारो! तुम मुझे मधुमक्खियों द्वारा एकत्र किए गए मधु से युक्त करो, जिस से मैं मनुष्यों के प्रति ओजपूर्ण वाणी का उच्चारण कर सकूं. (१९)
O Ashchinikumaro who holds gold ornaments for shobha! You fill me with honey collected by bees, so that I may utter a loud voice to men. (19)