हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.1.18

कांड 9 → सूक्त 1 → मंत्र 18 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
यद्गि॒रिषु॒ पर्व॑तेषु॒ गोष्वश्वे॑षु॒ यन्मधु॑ । सुरा॑यां सि॒च्यमा॑नायां॒ यत्तत्र॒ मधु॒ तन्मयि॑ ॥ (१८)
पर्वतों में, पहाड़ी प्रदेशों में, गायों में तथा अश्चों में जो मधु है, जो मधु नीचे की ओर बहने वाले जलों में है, वह मधु मुझ में स्थित हो. (१८)
The honey that is in the mountains, in the hilly regions, in the cows and in the horses, the honey that is in the water flowing downwards, that honey should be located in me. (18)