हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.10.2

कांड 9 → सूक्त 10 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
बृह॒स्पति॑रू॒र्जयोद्गा॑यति॒ त्वष्टा॒ पुष्ट्या॒ प्रति॑ हरति॒ विश्वे॑ दे॒वा नि॒धन॑म् ॥ (२)
अन्न के रस से उत्पन्न ऊर्जा से बृहस्पति उदगायन करते हैं, त्वष्टा पुष्टि प्रदान करते हैं और विश्वे देव पूर्णता प्रदान करते हैं. (२)
Jupiter rises with the energy generated from the juice of food, provides tvashta confirmation and Vishme Dev provides perfection. (2)