हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
तस्मा॑ उ॒षा हिङ्कृ॑णोति सवि॒ता प्र स्तौ॑ति ॥ (१)
उषा उस के लिए हुंकार करती है और सूर्य उस की स्तुति करता है. (१)
Usha calls for him and the sun praises him. (1)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
बृह॒स्पति॑रू॒र्जयोद्गा॑यति॒ त्वष्टा॒ पुष्ट्या॒ प्रति॑ हरति॒ विश्वे॑ दे॒वा नि॒धन॑म् ॥ (२)
अन्न के रस से उत्पन्न ऊर्जा से बृहस्पति उदगायन करते हैं, त्वष्टा पुष्टि प्रदान करते हैं और विश्वे देव पूर्णता प्रदान करते हैं. (२)
Jupiter rises with the energy generated from the juice of food, provides tvashta confirmation and Vishme Dev provides perfection. (2)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
नि॒धनं॒ भूत्याः॑ प्र॒जायाः॑ पशू॒नां भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (३)
जो इस बात को जानता है, वह सेवकों, संतानों और पशुओं के पालन की पूर्णता प्राप्त करता है. (३)
He who knows this attains the perfection of the rearing of servants, children, and animals. (3)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
तस्मा॑ उ॒द्यन्त्सूर्यो॒ हिङ्कृ॑णोति संग॒वः प्र स्तौ॑ति ॥ (४)
उदय होते हुए सूर्य उस के लिए हुंकार करते हैं और किरणों वाले सूर्य उस की प्रशंसा करते हैं. (४)
Rising sun calls for him and the sun with rays praises him. (4)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
म॒ध्यन्दि॑न॒ उद्गा॑यत्यपरा॒ह्णः प्रति॑ हरत्यस्तं॒यन्नि॒धन॑म् । नि॒धनं॒ भूत्याः॑ प्र॒जायाः॑ पशू॒नां भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (५)
सूर्य माध्यंदिन अर्थात्‌ दोपहर के समय उस की प्रशंसा करते हैं और दोपहर के बाद उस की मृत्यु का विनाश करते हैं. जो इस बात को जानता है, वह समृद्धि की प्रजाओं और पशुओं को प्राप्त करता है. (५)
The sun praises him in the afternoon and destroys his death after noon. He who knows this receives the people and animals of prosperity. (5)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
तस्मा॑ अ॒भ्रो भव॒न्हिङ्कृ॑णोति स्त॒नय॒न्प्र स्तौ॑ति ॥ (६)
उत्पन्न होने वाला बादल उस के लिए हुंकार करता है और गर्जन करता हुआ उस की प्रशंसा करता है. (६)
The cloud that arises calls for him and roars and praises him. (6)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
वि॒द्योत॑मानः॒ प्रति॑ हरति॒ वर्ष॒न्नुद्गा॑यत्युद्गृ॒ह्णन्नि॒धन॑म् । नि॒धनं॒ भूत्याः॑ प्र॒जायाः॑ पशू॒नां भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (७)
बादल दमकता हुआ उस का प्रतिहार करता है, बरसता हुआ उद्गान करता [ तथा उद्ग्रहण करता हुआ उसे पूर्णता प्रदान करता है. जो इस प्रकार जानता है, वह प्रजाओं और पशुओं की संपन्नता प्राप्त करता है. (७)
The cloud burns, foretells him, exalts in the rain, and gives him perfection by exhaling; he who knows in this way attains the prosperity of people and animals. (7)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
अति॑थी॒न्प्रति॑ पश्यति हिङ्कृणोत्य॒भि व॑दति॒ प्र स्तौत्यु॑द॒कं याच॒त्युद्गा॑यति ॥ (८)
वह अतिथियों को देखता है तो उन्हें बुलाता है, अभिवादन करता है, जल प्रस्तुत करता है और उन की प्रशंसा करता है. (८)
When he sees the guests, he calls them, greets them, presents water and praises them. (8)
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