अथर्ववेद (कांड 9)
अति॑थी॒न्प्रति॑ पश्यति हिङ्कृणोत्य॒भि व॑दति॒ प्र स्तौत्यु॑द॒कं याच॒त्युद्गा॑यति ॥ (८)
वह अतिथियों को देखता है तो उन्हें बुलाता है, अभिवादन करता है, जल प्रस्तुत करता है और उन की प्रशंसा करता है. (८)
When he sees the guests, he calls them, greets them, presents water and praises them. (8)