अथर्ववेद (कांड 9)
रक्षां॑सि॒ लोहि॑तमितरज॒ना ऊब॑ध्यम् ॥ (१७)
राक्षस इस के लोहित अर्थात रक्त और अन्य जन इस के ऊवध्य हैं. (१७)
The demons are its lohit i.e. blood and other people are its roots. (17)
कांड 9 → सूक्त 12 → मंत्र 17 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation