हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.13.22

कांड 9 → सूक्त 13 → मंत्र 22 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 13
सं ते॑ शी॒र्ष्णः क॒पाला॑नि॒ हृद॑यस्य च॒ यो वि॒धुः । उ॒द्यन्ना॑दित्य र॒श्मिभिः॑ शी॒र्ष्णो रोग॑मनीनशोऽङ्गभे॒दम॑शीशमः ॥ (२२)
तेरे शीश पर प्रकाशमान सूर्य ने अपनी किरणों के द्वारा तेरे सभी रोग समाप्त कर दिए हैं. तेरे शीश में और हृदय में जो अंगों संबंधी दुर्बलता थी, उसे चंद्रमा ने समाप्त कर दिया है. (२२)
The sun shining on your head has eliminated all your diseases through its rays. The moon has eliminated the weakness of the organs in your head and in the heart. (22)