हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.13.5

कांड 9 → सूक्त 13 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 13
अ॑ङ्गभे॒दम॑ङ्गज्व॒रं वि॑श्वा॒ङ्ग्यं वि॒सल्प॑कम् । सर्वं॑ शीर्ष॒र्ण्यं ते॒ रोगं॑ ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे ॥ (५)
अंग भेद, अंग ज्वर, विश्वांग्य एवं विसल्पक-ये सभी शीश संबंधी रोग हैं. हम इन्हें पूर्ण रूप से तुझ से दूर करते हैं. (५)
Organ differences, organ fever, visceral and dysentery - all these are glass-related diseases. We completely remove them from you. (5)