हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.13.7

कांड 9 → सूक्त 13 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 13
य ऊ॒रू अ॑नु॒सर्प॒त्यथो॒ एति॑ ग॒वीनि॑के । यक्ष्मं॑ ते अ॒न्तरङ्गे॑भ्यो ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे ॥ (७)
जो गवीनिका नाम की नाड़ियों में तथा जंघाओं में घूमता है, उस यक्ष्मा रोग को हम तेरे अंतरंग अंगों से बाहर निकालते हैं. (७)
Which roams in the veins and thighs called Gavinica, we remove that tuberculosis disease from your intimate organs. (7)