हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
अ॒स्य वा॒मस्य॑ पलि॒तस्य॒ होतु॒स्तस्य॒ भ्राता॑ मध्य॒मो अ॒स्त्यश्नः॑ । तृ॒तीयो॒ भ्राता॑ घृ॒तपृ॑ष्ठो अ॒स्यात्रा॑पश्यं वि॒श्पतिं॑ स॒प्तपु॑त्रम् ॥ (१)
आह्वान करने योग्य सूर्य स्तुति कर्ता का पालन करते हैं. उन सूर्य के मध्यम भ्राता वायु देव हैं जो आकाश में जल ले जाते हैं. इन सूर्य देव के तीसरे भ्राता अग्नि हैं. इस प्रकार मैं सूर्य को ही प्रमुख एवं आश्चर्यजनक समझता हूं. (१)
Invoke the Sun follows the praiser. The middle brother of those suns is the air god who carries water in the sky. Agni is the third brother of sun god. In this way, I consider the sun to be the main and surprising. (1)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
स॒प्त यु॑ञ्जन्ति॒ रथ॒मेक॑चक्र॒मेको॒ अश्वो॑ वहति स॒प्तना॑मा । त्रि॒नाभि॑ च॒क्रम॒जर॑मन॒र्वं यत्रे॒मा विश्वा॒ भुव॒नाधि॑ त॒स्थुः ॥ (२)
सूर्य॒ के एक पहिए वाले रथ में सात किरणें जुड़ जाती हैं जो सरकने वाली हैं एवं अन्य ज्योतियों को पराजित करने वाली हैं. सात ऋषियों द्वारा नमस्कार करने योग्य उन सूर्य के रथ को एक घोड़ा खींचता है. सूर्य के रथ के पहिए में ग्रीष्म, वर्षा एवं शीत ऋतु रूपी तीन नाभियां हैं. यह जर्जर न होने वाला पहिया सदैव घूमता रहता है. सूर्य के द्वारा कालनिर्धारण में ही समस्त विश्व आश्रित है. (२)
In the one-wheeled chariot of the sun, seven rays are added which are sliding and defeating other lights. A horse pulls the chariot of those suns worthy of being greeted by the seven sages. The wheel of the sun's chariot has three navels in the form of summer, rain and winter season. This non-shabby wheel always rotates. The whole world is dependent on the determination of the sun. (2)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
इ॒मं रथ॒मधि॒ ये स॒प्त त॒स्थुः स॒प्तच॑क्रं स॒प्त व॑ह॒न्त्यश्वाः॑ । स॒प्त स्वसा॑रो अ॒भि सं न॑वन्त॒ यत्र॒ गवां॒ निहि॑ता स॒प्त नामा॑ ॥ (३)
सूर्य के सात पहियों वाले रथ को सात घोड़े खींचते हैं. सात ऋषि इस रथ के समीप खड़े रहते हैं. सात बहनें सूर्य की स्तुति करती हैं. किरणों रूपी सात गाएं सूर्य के रथ से संबंधित हैं, जो इसे रस युक्त बनाती हैं. (३)
Seven horses pull the chariot with seven wheels of the sun. Seven sages stand near this chariot. Seven sisters praise the sun. The seven songs of rays are related to the chariot of the sun, which makes it juice-rich. (3)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
को द॑दर्श प्रथ॒मं जाय॑मानमस्थ॒न्वन्तं॒ यद॑न॒स्था बिभ॑र्ति । भूम्या॒ असु॒रसृ॑गा॒त्मा क्व स्वि॒त्को वि॒द्वांस॒मुप॑ गा॒त्प्रष्टु॑मे॒तत् ॥ (४)
सर्वप्रथम उत्पन्न होने वाले अस्थिरहित को किस ने देखा था जो समस्त विश्व को धारण करता है? भूमि को प्राणवंत करने वाले जल की आत्मा कहां स्थित है? इस बात को पूछने के लिए विद्वान्‌ के समीप कौन गया था? (४)
Who first saw the unstable interest that arises that holds the whole world? Where is the soul of the water that nourishes the land located? Who went near the scholar to ask this? (4)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
इ॒ह ब्र॑वीतु॒ य ई॑म॒ङ्ग वेदा॒स्य वा॒मस्य॒ निहि॑तं प॒दं वेः । शी॒र्ष्णः क्षी॒रं दु॑ह्रते॒ गावो॑ अस्य व॒व्रिं वसा॑ना उद॒कं प॒दाऽपुः॑ ॥ (५)
इन सूर्य के विषय में जो जानता हो, वह बताए कि इन के चरण आकाश में कहां स्थित हैं? गाएं इन्हीं सूर्य के मंडल में दूध दुहाती हैं तथा वे गाएं इन्हीं सूर्य की किरणों के द्वारा जल पीती हैं. (५)
Whoever knows about these suns, tell us where their feet are located in the sky. Cows milk in the sun's circle and those cows drink water through the rays of these suns. (5)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
पाकः॑ पृच्छामि॒ मन॒साऽवि॑जानन्दे॒वाना॑मे॒ना निहि॑ता प॒दानि॑ । व॒त्से ब॒ष्कयेऽधि॑ स॒प्त तन्तू॒न्वि त॑त्निरे क॒वय॒ ओत॒वा उ॑ ॥ (६)
सूर्य के रूप को पूर्ण रूप से न जानता हुआ मैं अपने मन से पूछता हूं कि समस्त देवों के रक्षासाधन इन सूर्य में ही निहित हैं. विद्वानों ने सूर्य देव के विस्तार के हेतु सात तंतु स्थापित कर दिए हैं. (६)
Not fully aware of the form of the sun, I ask my mind that the defense of all the gods is contained in this sun. Scholars have established seven fibers for the expansion of the Sun God. (6)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
अचि॑कित्वांश्चिकि॒तुष॑श्चि॒दत्र॑ क॒वीन्पृ॑च्छामि वि॒द्वनो॒ न वि॒द्वान् । वि यस्त॒स्तम्भ॒ षडि॒मा रजां॑स्य॒जस्य॑ रू॒पे किमपि॑ स्वि॒देक॑म् ॥ (७)
अज्ञानी मैं विद्वानों और ज्ञानियों से पूछता हूं कि जिस ने छः रजोगुणी तत्त्वों को स्तंभित किया है, वह अजन्मा क्या एक ही है? मैं संदेह में पड़ा हूं. और संदेहरहित जनों से अपना संदेह निवारण करना चाहता हूं. (७)
Ignorant I ask scholars and the wise, is the unborn the one who has pillared the six rajoguni elements the same? I am in doubt. And I want to remove my doubts from those without doubt. (7)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
मा॒ता पि॒तर॑मृ॒त आ ब॑भाज धी॒त्यग्रे॒ मन॑सा॒ सं हि ज॒ग्मे । सा बी॑भ॒त्सुर्गर्भ॑रसा॒ निवि॑द्धा॒ नम॑स्वन्त॒ इदु॑पवा॒कमी॑युः ॥ (८)
सूर्य के जन्म लेते समय ही उन की माता उन के पिता की सेवा करती है. इस के फल स्वरूप वह बुद्धि और मन से युक्त हो जाती है एवं गर्भरूपी रस से निबद्ध हो जाती है. हवि का अन्न लिए हुए मनुष्य इस कथा के समीप पहुंच जाते हैं. (८)
At the time of the birth of the sun, his mother serves his father. As a result of this, she becomes full of intelligence and mind and is bound by the juice of the womb. People carrying Havi's food approach this story. (8)
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