हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.14.3

कांड 9 → सूक्त 14 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
इ॒मं रथ॒मधि॒ ये स॒प्त त॒स्थुः स॒प्तच॑क्रं स॒प्त व॑ह॒न्त्यश्वाः॑ । स॒प्त स्वसा॑रो अ॒भि सं न॑वन्त॒ यत्र॒ गवां॒ निहि॑ता स॒प्त नामा॑ ॥ (३)
सूर्य के सात पहियों वाले रथ को सात घोड़े खींचते हैं. सात ऋषि इस रथ के समीप खड़े रहते हैं. सात बहनें सूर्य की स्तुति करती हैं. किरणों रूपी सात गाएं सूर्य के रथ से संबंधित हैं, जो इसे रस युक्त बनाती हैं. (३)
Seven horses pull the chariot with seven wheels of the sun. Seven sages stand near this chariot. Seven sisters praise the sun. The seven songs of rays are related to the chariot of the sun, which makes it juice-rich. (3)