अथर्ववेद (कांड 9)
तेध॒राञ्चः॒ प्र प्ल॑वन्तां छि॒न्ना नौरि॑व॒ बन्ध॑नात् । न साय॑कप्रणुत्तानां॒ पुन॑रस्ति नि॒वर्त॑नम् ॥ (१२)
बंधन टूटने पर नौका जिस प्रकार नीचे की ओर बहती है, मेरे शत्रु उसी प्रकार नीचे गिरते चले जाएं, क्योंकि जो लोग बाण से घायल हो कर भागते है, वे वापस नहीं आते. (१२)
The way the boat flows down when the bond is broken, my enemies should go down in the same way, because those who run away injured by the arrow do not come back. (12)