अथर्ववेद (कांड 9)
अस॑र्ववीरश्चरतु॒ प्रणु॑त्तो॒ द्वेष्यो॑ मि॒त्राणां॑ परिव॒र्ग्यः स्वाना॑म् । उ॒त पृ॑थि॒व्यामव॑ स्यन्ति वि॒द्युत॑ उ॒ग्रो वो॑ दे॒वः प्र मृ॑णत्स॒पत्ना॑न् ॥ (१४)
इस मंत्र की शक्ति से प्रेरणा पा कर मेरा शत्रु पुत्रों, पौत्रों एवं समस्त वीरों से रहित हो कर घूमे. उस के मित्र भी उस का त्याग कर दें. विद्युत पृथ्वी पर उस के टुकड़े कर दे. हे यजमान! देवगण तुम्हारे शत्रुओं का मर्दन करें. (१४)
Inspired by the power of this mantra, my enemy roamed free from sons, grandsons and all the heroes. His friends should also abandon him. Make electricity cut it into pieces on earth. O host! May the gods kill your enemies. (14)