हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.2.22

कांड 9 → सूक्त 2 → मंत्र 22 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
याव॑ती॒र्भृङ्गा॑ ज॒त्वः कु॒रूर॑वो॒ याव॑ती॒र्वघा॑ वृक्षस॒र्प्यो बभू॒वुः । तत॒स्त्वम॑सि॒ ज्याया॑न्वि॒श्वहा॑ म॒हांस्तस्मै॑ ते काम॒ नम॒ इत्कृ॑णोमि ॥ (२२)
हे कामदेव! भृंग, जतु, कर, वृक्ष एवं सर्प जितने विशाल हैं, तुम उन सभी से महान हो. तुम सभी में व्यस्त हो. मैं तुम को नमस्कार करता हूं. (२२)
O Cupid! You are greater than all the beetles, jatus, karas, trees and snakes are. You're all busy. I salute you. (22)