अथर्ववेद (कांड 9)
यस्त्वा॑ शाले निमि॒माय॑ संज॒भार॒ वन॒स्पती॑न् । प्र॒जायै॑ चक्रे त्वा शाले परमे॒ष्ठी प्र॒जाप॑तिः ॥ (११)
हे शाला, जिस ने तेरा निर्माण किया है और तेरा निर्माण करने के लिए जो वृक्षों की लकड़ी लाया है, प्रजापति ने प्रजा के निमित्त तेरा निर्माण किया है. (११)
O school, the one who built you and the wood of the trees that he has brought to build you, Prajapati has built you for the sake of the people. (11)