हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.3.12

कांड 9 → सूक्त 3 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 3
नम॒स्तस्मै॒ नमो॑ दा॒त्रे शाला॑पतये च कृण्मः । नमो॒ऽग्नये॑ प्र॒चर॑ते॒ पुरु॑षाय च ते॒ नमः॑ ॥ (१२)
हे कृष्ण! शलाका दान करने वाले को, शाला के स्वामी को, अग्नि के लिए, घूमनेफिरने वाले पुरुष के लिए तथा तुझे भी नमस्कार है. (१२)
O Krishna! Salutations to the one who donates the shalaka, to the master of the school, to the agni, to the man who roams around and also to you. (12)