अथर्ववेद (कांड 9)
गोभ्यो॒ अश्वे॑भ्यो॒ नमो॒ यच्छाला॑यां वि॒जाय॑ते । विजा॑वति॒ प्रजा॑वति॒ वि ते॒ पाशां॑श्चृतामसि ॥ (१३)
शाला में जन्म लेने वाली गायों और घोड़ों को नमस्कार है. हे विजावती और प्रजावती! हम तेरे बंधनों को खोलते हैं. (१३)
Salutations to the cows and horses born in the school. O Vijayavati and Prajavati! We open your bonds. (13)