अथर्ववेद (कांड 9)
ई॑जा॒नानां॑ सु॒कृतां॑ लो॒कमीप्स॒न्पञ्चौ॑दनं ब्र॒ह्मणे॒ऽजं द॑दाति । स व्याप्तिम॒भि लो॒कं ज॑यै॒तं शि॒वो॒ऽस्मभ्यं॒ प्रति॑गृहीतो अस्तु ॥ (१२)
यज्ञ करने वाले पुण्यात्माओं के लोक में जाने की इच्छा करने वाला जो यजमान ब्रह्मा के लिए अज का दान करता है, वह मंगलमय स्थान प्राप्त करता है एवं स्वर्ग को जीतता है. (१२)
The host who wishes to go to the world of the virtuous performing yajna, who donates aj for Brahma, attains a glorious place and conquers heaven. (12)