हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.6.10

कांड 9 → सूक्त 6 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 6
यत्क॑शिपूपबर्ह॒णमा॒हर॑न्ति परि॒धय॑ ए॒व ते ॥ (१०)
जो कशिपु उपबर्हण को लाते हैं, वे ही यज्ञ की परिधियां हैं. (१०)
The kapipus who bring upbarhan are the peripheries of the yajna. (10)