अथर्ववेद (कांड 9)
सर्वो॒ वा ए॒ष ज॒ग्धपा॑प्मा॒ यस्यान्न॑म॒श्नन्ति॑ ॥ (८)
अतिथि जिस का अन्न खाता है, उस के सभी पापों को भी खाता है. (८)
The guest also eats all the sins of the one whose food he eats. (8)
कांड 9 → सूक्त 7 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation