हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.101.8

मंडल 1 → सूक्त 101 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 101
यद्वा॑ मरुत्वः पर॒मे स॒धस्थे॒ यद्वा॑व॒मे वृ॒जने॑ मा॒दया॑से । अत॒ आ या॑ह्यध्व॒रं नो॒ अच्छा॑ त्वा॒या ह॒विश्च॑कृमा सत्यराधः ॥ (८)
हे मरुतों सहित इंद्र! तुम उत्तम घर अथवा नवीन स्थान में प्रसन्न रहते हो. तुम हमारे यज्ञ में आओ. हे सत्यधन! तुम्हारी कामना से हम हव्य देते हैं. (८)
O Indra with the Maruts! You are happy in a good house or a new place. You come to our yagna. O Satyadhan! With your wish, we give happiness. (8)