हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.103.8

मंडल 1 → सूक्त 103 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 103
शुष्णं॒ पिप्रुं॒ कुय॑वं वृ॒त्रमि॑न्द्र य॒दाव॑धी॒र्वि पुरः॒ शम्ब॑रस्य । तन्नो॑ मि॒त्रो वरु॑णो मामहन्ता॒मदि॑तिः॒ सिन्धुः॑ पृथि॒वी उ॒त द्यौः ॥ (८)
हे इंद्र! तुमने शुष्ण, पिप्रु एवं कुयव का वध तथा शंबर असुर के नगरों को विदीर्ण किया था. हमने इस स्तोत्र द्वारा जो चाहा है, उसकी पूजा मित्र, वरुण, अदिति, सिंधु, धरती और आकाश करें. (८)
O Indra! You killed Shushna, Pipru and Kuyava and destroyed the cities of Shambar Asura. Let friends, Varuna, Aditi, Sindhu, Prithvi and Akash worship what we have desired through this hymn. (8)