हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.104.6

मंडल 1 → सूक्त 104 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 104
स त्वं न॑ इन्द्र॒ सूर्ये॒ सो अ॒प्स्व॑नागा॒स्त्व आ भ॑ज जीवशं॒से । मान्त॑रां॒ भुज॒मा री॑रिषो नः॒ श्रद्धि॑तं ते मह॒त इ॑न्द्रि॒याय॑ ॥ (६)
हे इंद्र! हमें सूर्य के प्रति, जलों के प्रति एवं पापरहित होने के कारण जीवों द्वारा प्रशंसित मानवों के प्रति भक्त बनाओ. हमारी गर्भस्थ संतान की हिंसा मत करना. हम तुम्हारे महान्‌ बल के प्रति श्रद्धालु हैं. (६)
O Indra! Make us devotees to the sun, to the waters and to the human beings admired by the living beings for being sinless. Don't do violence to our pregnant children. We are reverent to your great power. (6)