ऋग्वेद (मंडल 1)
सु॒प॒र्णा ए॒त आ॑सते॒ मध्य॑ आ॒रोध॑ने दि॒वः । ते से॑धन्ति प॒थो वृकं॒ तर॑न्तं य॒ह्वती॑र॒पो वि॒त्तं मे॑ अ॒स्य रो॑दसी ॥ (११)
सूर्य की रशमियां सबको आवरण करने वाले आकाश में वर्तमान हैं. वे विशाल जल को पार करने वाले भेड़िए को रोकती हैं. हे धरती और आकाश! मेरी यह बात जानो. (११)
The sun's rays are present in the sky that covers everyone. They stop the wolf crossing the huge water. O earth and sky! Know this thing of mine. (11)