हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.108.10

मंडल 1 → सूक्त 108 → श्लोक 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 108
यदि॑न्द्राग्नी पर॒मस्यां॑ पृथि॒व्यां म॑ध्य॒मस्या॑मव॒मस्या॑मु॒त स्थः । अतः॒ परि॑ वृषणा॒वा हि या॒तमथा॒ सोम॑स्य पिबतं सु॒तस्य॑ ॥ (१०)
हे कामवर्षक इंद्र और अग्नि! यदि तुम आकाश के परवर्ती, मध्यवर्ती या निम्नवर्ती धरातल में वर्तमान हो, तब भी इन स्थानों से आओ और निचोड़ा हुआ सोमरस पिओ. (१०)
O workman Indra and Agni! Even if you are present in the subsequent, intermediate or lower surface of the sky, come from these places and drink the squeezed somers. (10)