ऋग्वेद (मंडल 1)
य इ॑न्द्राग्नी चि॒त्रत॑मो॒ रथो॑ वाम॒भि विश्वा॑नि॒ भुव॑नानि॒ चष्टे॑ । तेना या॑तं स॒रथं॑ तस्थि॒वांसाथा॒ सोम॑स्य पिबतं सु॒तस्य॑ ॥ (१)
हे इंद्र और अग्नि! तुम्हारा जो अति विचित्र रथ समस्त संसार को प्रकाशित करता है, उसी एक रथ के द्वारा हमारे यज्ञ में आओ और ऋत्विजों द्वारा निचोड़े हुए सोम को पिओ. (१)
O Indra and Agni! Come to our yagna through the same chariot which illuminates the whole world, which illuminates the whole world and drink the som squeezed by the ritvijas. (1)
ऋग्वेद (मंडल 1)
याव॑दि॒दं भुव॑नं॒ विश्व॒मस्त्यु॑रु॒व्यचा॑ वरि॒मता॑ गभी॒रम् । तावा॑ँ अ॒यं पात॑वे॒ सोमो॑ अ॒स्त्वर॑मिन्द्राग्नी॒ मन॑से यु॒वभ्या॑म् ॥ (२)
हे इंद्र और अग्नि! सर्वव्यापक एवं अपने गौरव से गंभीरतायुक्त जो समस्त संसार का परिमाण है, वही सोम तुम दोनों के पीने के लिए एवं मन संतोष के लिए पर्याप्त हो. (२)
O Indra and Agni! Omnipresent and serious about your pride, which is the magnitude of the whole world, the same Mon is enough for both of you to drink and to satisfy your mind. (2)
ऋग्वेद (मंडल 1)
च॒क्राथे॒ हि स॒ध्र्य१॒॑ङ्नाम॑ भ॒द्रं स॑ध्रीची॒ना वृ॑त्रहणा उ॒त स्थः॑ । तावि॑न्द्राग्नी स॒ध्र्य॑ञ्चा नि॒षद्या॒ वृष्णः॒ सोम॑स्य वृष॒णा वृ॑षेथाम् ॥ (३)
हे इंद्र और अग्नि! तुम दोनों ने अपने कल्याणकारक दोनों नामों को संयुक्त कर लिया है. हे वृत्रहंताओ! तुम वृत्रवध में एक साथ थे. हे कामवर्षियो! तुम साथ-साथ बैठकर ही सोम को अपने उदर में स्थान दो. (३)
O Indra and Agni! You have both combined your two welfare names. O you, you are afraid! You were together in the circle. O kamayars! You sit together and place the mon in your stomach. (3)
ऋग्वेद (मंडल 1)
समि॑द्धेष्व॒ग्निष्वा॑नजा॒ना य॒तस्रु॑चा ब॒र्हिरु॑ तिस्तिरा॒णा । ती॒व्रैः सोमैः॒ परि॑षिक्तेभिर॒र्वागेन्द्रा॑ग्नी सौमन॒साय॑ यातम् ॥ (४)
अग्नि के भली-भांति दीप्त होने पर दो अध्वर्युओं ने घी से भरा पात्र लेकर सींचते हुए कुश फैलाए हैं. हे इंद्र और अग्नि! तीव्र मद करने वाले एवं चारों ओर पात्रों में भरे हुए सोम के कारण हमारे सम्मुख आओ एवं हम पर कृपा करो. (४)
When the fire is well lit, two of the disciples have taken a pot full of ghee and spread the watering kush. O Indra and Agni! Come before us because of the intensely intoxicating and full of vessels all around us and have mercy on us. (4)
ऋग्वेद (मंडल 1)
यानी॑न्द्राग्नी च॒क्रथु॑र्वी॒र्या॑णि॒ यानि॑ रू॒पाण्यु॒त वृष्ण्या॑नि । या वां॑ प्र॒त्नानि॑ स॒ख्या शि॒वानि॒ तेभिः॒ सोम॑स्य पिबतं सु॒तस्य॑ ॥ (५)
हे इंद्र और अग्नि! तुमने जो वीरता के काम किए हैं, जिन दिखाई देने वाले जीवों की सृष्टि एवं वर्षा आदि कर्म किए हैं तथा तुम दोनों की प्राचीन कल्याणकारी मित्रता है, उन सबके सहित आकर निचोड़ा हुआ सोमरस पिओ. (५)
O Indra and Agni! Come and drink the squeezed somers along with all the acts of heroism you have done, the works of creation and rain of visible beings, and the ancient welfare friendship of both of you. (5)
ऋग्वेद (मंडल 1)
यदब्र॑वं प्रथ॒मं वां॑ वृणा॒नो॒३॒॑ऽयं सोमो॒ असु॑रैर्नो वि॒हव्यः॑ । तां स॒त्यां श्र॒द्धाम॒भ्या हि या॒तमथा॒ सोम॑स्य पिबतं सु॒तस्य॑ ॥ (६)
हे इंद्र और अग्नि! मैने यज्ञकर्म के प्रारंभ में ही जो कहा था कि तुम दोनों का वरण करके तुम्हें सोम से प्रसन्न करूंगा, मेरी वही सच्ची श्रद्धा विचारकर आओ और निचोड़े हुए सोम को पिओ. यह सोम ऋत्विजों द्वारा विशेष आहुति देने योग्य है. (६)
O Indra and Agni! What I said at the very beginning of the yajnakarma that I will make you happy with Som by selecting both of you, come to my true faith and drink the squeezed Som. It deserves a special offering by the Som Ritvijs. (6)
ऋग्वेद (मंडल 1)
यदि॑न्द्राग्नी॒ मद॑थः॒ स्वे दु॑रो॒णे यद्ब्र॒ह्मणि॒ राज॑नि वा यजत्रा । अतः॒ परि॑ वृषणा॒वा हि या॒तमथा॒ सोम॑स्य पिबतं सु॒तस्य॑ ॥ (७)
हे यज्ञपात्र एवं अभीष्टदाता इंद्र और अग्नि! चाहे तुम अपने निवास में आनंद से बैठे हो, चाहे किसी ब्राह्मण या राजा के यज्ञ में पहुंचकर प्रसन्न हो रहे हो, इन समस्त स्थानों से आओ एवं निचोड़ा हुआ सोमरस पिऔ. (७)
O yajnapatra and the needy, Indra and Agni! Whether you are sitting happily in your abode, whether you are happy to arrive at the yagna of a Brahmin or a king, come from all these places and drink the squeezed somras. (7)
ऋग्वेद (मंडल 1)
यदि॑न्द्राग्नी॒ यदु॑षु तु॒र्वशे॑षु॒ यद्द्रु॒ह्युष्वनु॑षु पू॒रुषु॒ स्थः । अतः॒ परि॑ वृषणा॒वा हि या॒तमथा॒ सोम॑स्य पिबतं सु॒तस्य॑ ॥ (८)
हे कामवर्षक इंद्र और अग्नि! यदि तुम यदु, तुर्वश, अनु, द्रुह्यु एवं पुरु जन समूह के बीच स्थित हो, तब भी इन समस्त स्थानों से आओ एवं निचोड़ा हुआ सोमरस पिओ. (८)
O health-giving Indra and Agni! Even if you are located among the group of Yadu, Turvash, Anu, Druhuyu and Puru people, come from all these places and drink squeezed somras. (8)