ऋग्वेद (मंडल 1)
यदि॑न्द्राग्नी॒ उदि॑ता॒ सूर्य॑स्य॒ मध्ये॑ दि॒वः स्व॒धया॑ मा॒दये॑थे । अतः॒ परि॑ वृषणा॒वा हि या॒तमथा॒ सोम॑स्य पिबतं सु॒तस्य॑ ॥ (१२)
हे कामवर्षक इंद्र और अग्नि! यदि तुम उदित सूर्य के कारण प्रकाशित आकाश में अपने ही तेज से प्रसन्न हो रहे हो, तब भी वहां से आओ और निचोड़ा हुआ सोम पिओ. (१२)
O workman Indra and Agni! If you are pleased with your own brightness in the sky illuminated because of the rising sun, then still come from there and drink the squeezed mon. (12)